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Soil is not merely agricultural land, but the foundation of the farmer's future.

Soil is not merely agricultural land, but the foundation of the farmer's future.
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Soil is not merely agricultural land, but the foundation of the farmer's future.

मिट्टी सिर्फ खेती की जमीन नहीं, बल्कि किसान के भविष्य की नींव है। इसी सोच के साथ देशभर में चल रहा है “खेत बचाओ अभियान” — संतुलित उर्वरक उपयोग जागरूकता अभियान। इसका उद्देश्य किसानों को यह समझाना है कि जरूरत से ज्यादा रासायनिक उर्वरकों का उपयोग मिट्टी की सेहत को कमजोर कर सकता है, जबकि संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग खेती को टिकाऊ बनाता है।
देश के अलग-अलग राज्यों में किसान जागरूकता शिविर, प्रशिक्षण कार्यक्रम, फील्ड डेमो, ग्राम संवाद और exposure visits के माध्यम से किसानों को मृदा स्वास्थ्य, जैव उर्वरकों, हरी खाद और जैविक स्रोतों के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है। किसान भाई-बहनों को बताया जा रहा है कि मिट्टी परीक्षण के अनुसार उर्वरक का प्रयोग करने से न केवल लागत कम होती है, बल्कि उत्पादन और मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहती है।
अब तक इस अभियान के माध्यम से 6.29 लाख से अधिक किसानों तक पहुंच बनाई जा चुकी है। देशभर में हजारों जागरूकता शिविर, प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। पंचायत प्रतिनिधियों, एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों और इनपुट डीलरों की भागीदारी से यह अभियान जन-आंदोलन का रूप ले रहा है।
अभियान के दौरान किसानों ने जैविक और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग, हरी खाद के प्रयोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर उत्साह दिखाया। खेतों में आयोजित कार्यक्रमों ने किसानों को “सीखो और अपनाओ” का व्यावहारिक अनुभव दिया।
आइए, हम सब मिलकर मिट्टी की सेहत बचाएं, खेती को टिकाऊ बनाएं और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य तैयार करें।