मृदा स्वास्थ प्रबन्धन व संतुलित उर्वरक उपयोग जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
देश भर में कृषि मंत्रालय भारत सरकार द्वारा मृदा स्वास्थ प्रबंधन व संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के निर्देशानुसार केन्द्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर, बरेली द्वारा डॉ॰ जगवीर सिंह त्यागी, निदेशक के निर्देशन में मृदा स्वास्थ प्रबंधन व संतुलित उर्वरक के उपयोग विषय पर दिनांक 19-05-2026 को ग्राम पीपलसाना चौधरी, ब्लॉक भोजीपुरा, जिला- बरेली में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिकों व नोडल ऑफिसर डॉ॰ एम॰ पी॰ सागर, डॉ॰ विनय कुमार वैज्ञानिक, द्वारा किसानो को उपरोक्त विषय पर व्याख्यान दिये गए। इस अवसर पर डॉ॰ एम॰ पी॰ सागर अध्यक्ष तकनीकी प्रसार अनुभाग ने किसानो का स्वागत करते हुए कहा कि किसानों द्वारा बिना मृदा परीक्षण के फसलों में रासायनिक उर्वरकों जैसे यूरिया, पोटाश तथा फास्फोरस का अतयधिक उपयोग किया जा रहा है जिससे मिट्टी का स्वास्थ बिगड़ रहा है मिट्टी की उर्वरता घट रही है तथा उत्पादकता भी कम हो रही है और लागत बड़ रही है। इसलिए किसानों को मिट्टी की जांच करा कर ही फसलों में संतुलित उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। 3 वर्षों में एक बार मिट्टी की जांच अवश्य कराने की सिफ़ारिश की और सॉइल हैल्थ कार्ड के द्वारा 12 मुख्य व सूक्ष्म पोषक तत्वों की जाँच की जा सकती है। इसके साथ ही किसानों को जैविक व ऑर्गैनिक खादों जैसे गोबर कि खाद, कम्पोस्ट तथा हरी खाद आदि को भी उपयोग में प्राथमिकता देने पर बल दिया। वैज्ञानिक डॉ॰ विनय कुमार ने किसानों को पॉल्ट्री बीट से तैयार कम्पोस्ट को भी कृषि फसलों में उपयोग करने की सलाह दी जो यूरिया के मुक़ाबले अधिक कारगर है क्योकि इसमें नाइट्रोजन की मात्रा अधिक होती है, परंतु इसका उपयोग कम्पोस्ट बना कर ही करना चाहिए, सीधे फसलों में नहीं डालनी चाहिए। कार्यक्रम में मौजूद प्रगतिशील फार्मर श्री हरी शंकर शर्मा ने भी वैज्ञानिकों के विचारों का समर्थन करते हुए अपने साथी किसानों से रसायनिक खादों के उपयोग को कम कर जैविक खादों के उपयोग की अपील की। कार्यक्रम में जगदीश बाबू पॉल्ट्री फार्मर व कृषक का विशेष सहयोग रहा।